मार्गदर्शिकाएँ · डर · साहस · विकास
भगवद्गीता 16.1
गीता एक श्रेष्ठ स्वभाव का पहला गुण निर्भयता बताती है। साहस वह भूमि है जिस पर दूसरे गुण उगते हैं।
भगवद्गीता · अध्याय 16, श्लोक 1
अभयं सत्त्वसंशुद्धिर्ज्ञानयोगव्यवस्थितिः।
दानं दमश्च यज्ञश्च स्वाध्यायस्तप आर्जवम्॥
abhayaṁ sattva-saṁśuddhir jñāna-yoga-vyavasthitiḥ
dānaṁ damaś ca yajñaś ca svādhyāyas tapa ārjavam
हिन्दी भावार्थ
निर्भयता, अंतःकरण की शुद्धि, ज्ञान और योग में दृढ़ स्थिति, दान, इंद्रियों का संयम, यज्ञ, स्वाध्याय, तप और सरलता —
अंग्रेज़ी अनुवाद · English translation
Fearlessness, purity of heart, steadfastness in knowledge and practice, generosity, self-restraint, sacrifice, study, discipline and straightforwardness —
सरल शब्दों में व्याख्या
गीता एक श्रेष्ठ स्वभाव का पहला गुण निर्भयता बताती है। साहस वह भूमि है जिस पर दूसरे गुण उगते हैं।
संदर्भ
अध्याय 16 'दैवी गुणों' की सूची से शुरू होता है। उसका पहला शब्द है 'अभयम्' — निर्भयता।
यह कब मदद कर सकता है
जब आपको ईमानदार, उदार या स्वयं के प्रति सच्चा होने के लिए हिम्मत चाहिए।
चिंतन प्रश्न
अगर आप थोड़ा कम डरते, तो क्या अलग करते?
एक छोटा अभ्यास
आज एक ईमानदार बात कहिए जिसे आप रोके हुए थे — प्रेम से।
इस श्लोक पर चिंतन कीजिए, अपने विचार सहेजिए या इसे कार्ड के रूप में साझा कीजिए।
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