मार्गदर्शिकाएँ · उद्देश्य · अनासक्ति · विकास
भगवद्गीता 2.50
योग सिर्फ़ चटाई पर नहीं होता। यह साधारण कामों को ध्यान, देखभाल और हल्के मन से करना है।
भगवद्गीता · अध्याय 2, श्लोक 50
बुद्धियुक्तो जहातीह उभे सुकृतदुष्कृते।
तस्माद्योगाय युज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम्॥
buddhi-yukto jahātīha ubhe sukṛta-duṣkṛte
tasmād yogāya yujyasva yogaḥ karmasu kauśalam
हिन्दी भावार्थ
समबुद्धि वाला व्यक्ति इसी जीवन में पुण्य और पाप दोनों के बंधन से मुक्त हो जाता है। इसलिए योग में लग जाओ — कर्म में कुशलता ही योग है।
अंग्रेज़ी अनुवाद · English translation
One whose understanding is steady lets go of both good and bad outcomes here. Therefore, devote yourself to yoga — yoga is skill in action.
सरल शब्दों में व्याख्या
योग सिर्फ़ चटाई पर नहीं होता। यह साधारण कामों को ध्यान, देखभाल और हल्के मन से करना है।
संदर्भ
श्रीकृष्ण योग की सबसे व्यावहारिक परिभाषाओं में से एक देते हैं: कुशल, पूरे मन से किया गया कर्म।
यह कब मदद कर सकता है
जब काम अर्थहीन लगे या आप रोज़मर्रा के कामों में ज़्यादा उपस्थिति लाना चाहें।
चिंतन प्रश्न
आज आप कौन-सा साधारण काम पूरे ध्यान से कर सकते हैं?
एक छोटा अभ्यास
कोई एक रोज़ का काम चुनिए — चाय बनाना, कप धोना — और उसे धीरे-धीरे, पूरे ध्यान से कीजिए।
इस श्लोक पर चिंतन कीजिए, अपने विचार सहेजिए या इसे कार्ड के रूप में साझा कीजिए।
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